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Vroom-Yetton Decision Model की व्याख्या

मुख्य निष्कर्ष: Vroom–Yetton Decision Model निर्णय लेते समय टीम की भागीदारी का उचित स्तर चुनने में नेताओं की सहायता करता है। यह निरंकुश से पूर्णतः सहभागी तक पाँच शैलियों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है और शैली को परिस्थिति के अनुरूप चुनने के लिए निदानात्मक प्रश्नों का उपयोग करता है। यह मॉडल गति, विशेषज्ञता और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता के बीच संतुलन बनाकर निर्णय की गुणवत्ता में सुधार करता है।

Vroom-Yetton Decision Model, जिसे Victor Vroom और Philip Yetton ने विकसित किया था 1973 में (और बाद में जिसके परिष्कार में सहयोग दिया Arthur Jagoने), एक परिस्थिति-आधारित नेतृत्व रूपरेखा है, जो परिस्थितिजन्य चरों के आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त निर्णय-निर्माण शैली चुनने में प्रबंधकों का मार्गदर्शन करती है। किसी एक “सर्वोत्तम” दृष्टिकोण की वकालत करने वाले निर्देशात्मक मॉडलों के विपरीत, यह मॉडल मानता है कि निर्णय की प्रभावशीलता संदर्भ पर निर्भर करती है, जिसमें समय की सीमाएँ, सूचना की उपलब्धता, टीम की गतिशीलता और अधीनस्थों की प्रतिबद्धता का महत्त्व शामिल हैं।

मूलतः, यह मॉडल निर्णय की गुणवत्ता और टीम की भागीदारी के बीच संतुलन बनाने में नेताओं की सहायता करता है तथा यह निर्धारित करने के लिए एक सुव्यवस्थित मार्ग प्रदान करता है कि कब एकतरफा कार्रवाई की जाए और कब दूसरों को शामिल किया जाए।


निर्णय-निर्माण की पाँच शैलियाँ

यह मॉडल निरंकुश से पूर्णतः सहभागी तक पाँच अलग-अलग नेतृत्व शैलियों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है:

शैलीविवरण
AIनिरंकुश I: नेता उपलब्ध सूचना का उपयोग करके अकेले निर्णय लेता है।
AIIनिरंकुश II: नेता अधीनस्थों से सूचना एकत्र करता है, लेकिन निर्णय अकेले लेता है।
CIपरामर्शात्मक I: नेता संबंधित टीम सदस्यों के साथ व्यक्तिगत रूप से समस्या साझा करता है, उनके विचार एकत्र करता है और अकेले निर्णय लेता है।
CIIपरामर्शात्मक II: नेता समूह के साथ सामूहिक रूप से समस्या पर चर्चा करता है, उनके विचार एकत्र करता है और अकेले निर्णय लेता है।
GIIसमूह II: नेता सामूहिक निर्णय को सुगम बनाता है, जिसमें सर्वसम्मति प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है और नेता समन्वयक की भूमिका निभाता है।

इस मॉडल को एक निर्णय-वृक्ष के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है, जो निम्नलिखित जैसे कारकों के आधार पर इष्टतम शैली निर्धारित करने के लिए निदानात्मक प्रश्न पूछता है:

  • निर्णय का महत्त्व
  • अधीनस्थों की प्रतिबद्धता का महत्त्व
  • नेता के पास पर्याप्त सूचना होना
  • समस्या की संरचना
  • अधीनस्थों की सहमति की संभावना

सैद्धांतिक आधार और अंतर्संबंध

Vroom-Yetton मॉडल Contingency Theory पर आधारित है और इस विचार के अनुरूप है कि नेतृत्व की प्रभावशीलता सार्वभौमिक होने के बजाय परिस्थितिजन्य होती है। इसका कई अन्य रूपरेखाओं से भी संबंध है:

  • Path-Goal Theory (House): दोनों मॉडल अधीनस्थों की अभिप्रेरणा और कार्य-निष्पादन बढ़ाने के लिए नेता की अनुकूलनशीलता पर बल देते हैं।
  • Situational Leadership (Hersey & Blanchard): जहाँ Situational Leadership अनुयायियों की तत्परता पर केंद्रित है, वहीं Vroom-Yetton निर्णय के संदर्भ और कार्य की संरचना पर बल देता है।
  • Tannenbaum-Schmidt Continuum: निरंकुश से लोकतांत्रिक तक नेतृत्व व्यवहार की यह सातत्य-रेखा Vroom-Yetton में निर्णय शैलियों के विस्तार को प्रतिबिंबित करती है।
  • Cognitive Resource Theory (Fiedler & Garcia): यह सुझाव देता है कि तनाव की स्थिति में निर्देशात्मक नेतृत्व अधिक प्रभावी होता है, जो समय के दबाव और निर्णय की गुणवत्ता पर इस मॉडल के बल का पूरक है।

यह मॉडल सहभागी नेतृत्व और साझा निर्णय-निर्माण के सिद्धांतों के भी अनुरूप है, जो चुस्त और ज्ञान-आधारित संगठनों में अधिकाधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं।


प्रचलित भ्रांतियाँ

Vroom‑Yetton Decision Model को लेकर अनेक भ्रांतियाँ हैं। इसे प्रायः गलती से एक कठोर सूत्र माना जाता है, जबकि वास्तव में यह एक लचीली रूपरेखा है, जो भागीदारी का उपयुक्त स्तर चुनने में नेताओं का मार्गदर्शन करती है। एक अन्य भ्रांति यह है कि यह मॉडल सभी परिस्थितियों में सामूहिक निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देता है, जबकि यह समय के दबाव, निर्णय की गुणवत्ता और टीम की प्रतिबद्धता जैसे कारकों के अनुरूप निर्णय शैली चुनने पर बल देता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह मॉडल इष्टतम परिणामों की गारंटी देता है, जबकि इसका उद्देश्य अधिक सुव्यवस्थित और संदर्भ-संवेदी प्रबंधकीय विवेक को सहायता देना है।


व्यावहारिक अनुप्रयोग: एक व्यावसायिक उदाहरण

प्रकरण: Cochlear Limited (ऑस्ट्रेलिया)
श्रवण प्रत्यारोपण प्रौद्योगिकी में वैश्विक अग्रणी Cochlear एक अत्यधिक विनियमित और नवाचार-प्रेरित परिवेश में काम करती है। नए प्रत्यारोपणों के लिए तकनीकी डिजाइन संबंधी निर्णय लेते समय, जहाँ सटीकता और अनुपालन सर्वोपरि होते हैं, नेता प्रायः AI या AII शैली अपनाते हैं। वे विशेषज्ञों की राय पर निर्भर रहते हैं, लेकिन गति और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए निर्णय का अधिकार अपने पास रखते हैं।

इसके विपरीत, बाजार विस्तार की रणनीतियों या ग्राहक अनुभव में सुधार की संभावनाएँ तलाशते समय Cochlear, CII या GII शैलियों का उपयोग कर सकती है। उदाहरण के लिए, रोगियों की सहभागिता के लिए मंच विकसित करते समय विभिन्न कार्यक्षेत्रों की टीमों (विपणन, R&D, नैदानिक विशेषज्ञों) को संयुक्त रूप से समाधान तैयार करने के लिए एक साथ लाया जाता है। यहाँ GII शैली स्वीकृति और समर्थन को बढ़ावा देती है, विविध विशेषज्ञताओं का लाभ उठाती है और कंपनी के रोगी-केंद्रित मूल्यों के अनुरूप होती है।

यह दोहरा अनुप्रयोग दर्शाता है कि Vroom-Yetton मॉडल किस प्रकार दाँव पर लगे हितों और संदर्भ के अनुसार दक्षता तथा समावेशिता में संतुलन बनाते हुए रणनीतिक लचीलापन प्रदान करता है।